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गंगा नदी के महत्‍वपूर्ण रोचक तथ्‍य- Ganga Nadi In Hindi

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हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, गंगा सबसे पवित्र नदी है। शास्त्रों में इसे पतितपावनी अर्थात लोगों के पाप को धोने वाली नदी कहकर प्रशंसा की गई है और इसका महत्व बताया गया है।

वर्तमान में यह नदी गंभीर प्रदूषण का शिकार है। लेकिन आज यह नदी चाहे जितनी भी प्रदूषित हो गई, लोगों की आस्था में कोई कमी नहीं आयी है। आइए जानते हैं, इस नदी के जुडी कुछ मान्यताएं और रोचक धार्मिक रोचक तथ्‍य

  • भारत सरकार के द्वारा गंगा नदी को भारत की राष्ट्रीय नदी घोषित किया है।
  • गंगा नदी की प्रधान शाखा भागीरथी है जो कुमायूँ में हिमालय के गौमुख नामक स्थान पर गंगोत्री हिमनद से निकलती हैं।
  • गंगा के इस उद्गम स्थल की ऊँचाई 3140 मीटर है। यहाँ गंगा जी को समर्पित एक मंदिर है।
  • गंगा इलाहाबाद के प्रयाग में यमुना नदी से संगम होता है। यह संगम स्थल हिन्दुओं का एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ है। इसे तीर्थराज प्रयाग कहा जाता है।
  • ऐतिहासिक साक्ष्यों से यह ज्ञात होता है कि १६वीं तथा १७वीं शताब्दी तक गंगा-यमुना प्रदेश घने वनों से ढका हुआ था।
  • गंगा नदी और बंगाल की खाड़ी के मिलन स्थल पर बनने वाले मुहाने को सुन्दरवन के नाम से जाना जाता है।
  • सुन्दरवन जो विश्व की बहुत-सी प्रसिद्ध वनस्पतियों और प्रसिद्ध बंगाल बाघ का गृहक्षेत्र है।
  • गंगा के तटीय क्षेत्रों में दलदल तथा झीलों के कारण यहाँ लेग्यूम, मिर्च, सरसो, तिल, गन्ना और जूट की बहुतायत फसल होती है।
  • गंगा नदी प्रणाली भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है; इसमें लगभग 375 मछली प्रजातियाँ उपलब्ध हैं।
  • गंगा तट के तीन बड़े शहर हरिद्वार, इलाहाबाद एवम् वाराणसी जो तीर्थ स्थलों में विशेष स्थान रखते हैं। इस कारण यहाँ श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या निरन्तर बनी रहती है तथा धार्मिक पर्यटन में महत्त्वपूर्ण योगदान करती हैं।
  • गंगा नदी के जल में प्राणवायु की मात्रा को बनाये रखने की असाधारण क्षमता है, लेकिन इसका कारण अभी तक अज्ञात है।
  • पौराणिक मान्‍यताओं के अनुसार गंगा का स्वर्ग से धरती पर आगमन हुआ था।
  • पुराणों के अनुसार स्वर्ग में गंगा को मन्‍दाकिनी और पाताल में भागीरथी कहते हैं।
  • गंगा के अवतरण के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ के कठोर तप एवं पुरुषार्थ से गंगा धरती पर आई।
  • गंगा के किनारे ही रहकर महर्षि वाल्मीकि ने महाग्रंथ रामायण की रचना की थी।
  • पूरी दु‍निया में केवल गंगा नदी ही एकमात्र नदी है, जिसे माता के नाम से पुकारा जाता है।
  • गंगा का महिमागान करते हुए शास्त्र कहते हैं-गंगा गंगेति यो ब्रूयातयोजनाम् शतैरपि। मुच्यते सर्वपापेभ्योविष्णुलोके स: गच्छति॥ अर्थात् जो गंगा का सैकड़ों योजन  दूर से भी स्मरण करता है, उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है। गंगा का उद्गम स्थल आज से कई सौ साल पहले वर्तमान गंगोत्री मंदिर तक फैला था। जो आज 17 किमी. खिसक चुका है।
  • जियोलॉजिक सर्वे ऑफ इंडिया के सर्वेक्षण के अनुसार, गत पचास वर्षों में गंगा का गोमुख ग्लैशियर प्रतिवर्ष 10 से 30 मीटर की गति से सिकुड़ता जा रहा है।
  • गोमुख ग्लैशियर की यही स्थिति रही तो अब से 125 सालों बाद गंगा का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
  • भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार गंगा के उद्गम पर प्रवाह जिस गति से घट रहा है, उसे देखते हुए अगले कुछ हज़ार वर्षों में इसके रूकने की संभावना है।
  • गंगा नदी गोमुख से बंगाल की खाड़ी तक यह 2071 किमी का सफर तय करती है।
  • इसका अप्रवाह क्षेत्र 471,502 वर्ग किमी में फैला है।
  • भारत देश की सिंचित भूमि का 40 प्रतिशत गंगाजल से ही सिंचित है।
  • 37 प्रतिशत लोग गंगा के बेसिन में निवास करती है
  • गंगा नदी धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्त्व के अतिरिक्त गंगा के किनारे अनेक सुरम्य स्थल हैं।
  • गंगाजल की एक विशेषता यह है कि गंगा का पानी कभी सड़ता नहीं है।
  • गंगाजल में कभी दुर्गन् नहीं आती, इसीलिए लोग गंगाजल को अपने घरों में हमेशा रखते हैं।
  • भारतीय हिन्दू धर्म में यदि किसी को मृत्यु के समय गंगाजल पिलाया जाए तो मरने वाले व्यक्ति को स्वर्ग की प्राप्ति होती है, ऐसी मान्यता है।
  • भारत में हर शुभ कार्य के लिए गंगा जल का प्रयोग किया जाता है।
  • मन्दिरों में जो चरणामृत के रूप में दिया जाता है वहगंगाजल ही होता है।
  • पोराणिक मान्‍यता है कि गंगाजल को ग्रहण करने से जीवों की अंतर आत्‍मा शुद्ध होती है।
  • गंगाजल को भारतीय हिन्दू धर्म में ब्रह्मद्रव और अमृत मानते हैं।
  • भारतीय धर्म शास्त्रों की मान्यता के अनुसार शास्त्रों में यदि गंगाजल की व्याख्या जितनी लिखने में आती है, यदि उन सबको थोड़े से वर्णन के साथ लिखा जाए तो एक ´गंगा पुराण´ की रचना हो सकती है।
  • राजनीतिक अस्थिरता एवं एक के बाद एक राजवंश बदलने के बाद भी गंगा नदी किनारे बसे शहर व्यापार, शिल्प एवं संस्कृति के लिए विश्वविख्यात रहे हैं।
  • गंगाजल की विशिष्टता एवं इसके प्रति आस्था केवल भारत तक सीमित नही है। वर्जिल व दांते जैसे महान् पश्चिमी साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में गंगा का उल्लेख किया है।
  • सिकंदर महान तो गंगा के सम्मोहन में बँध ही गया था।
  • अमेरिका को खोजने वाला कोलंबस गंगा की तलाश में भटकते हुए मार्ग खो बैठा था।
  • आइने अकबरी में लिखा है कि बादशाह अकबर पीने के लिए गंगाजल ही प्रयोग में लाते थे। इस जल को वह अमृत कहते थे।
  • वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि गंगा के पानी में ऐसे जीवाणु हैं जो सड़ाने वाले कीटाणुओं को पनपने नहीं देते, इसलिए पानी लंबे समय तक ख़राब नहीं होता।
  • गंगाजल में बैट्रिया फोस नामक एक बैक्टीरिया पाया गया है जो पानी के अंदर रासायनिक क्रियाओं से उत्पन्न होने वाले अवांछनीय पदार्थों को खाता रहता है। इससे जल की शुद्धता बनी रहती है।
  • गंगा के पानी मेंगंधक की प्रचुर मात्रा मौजूद रहती है; इसलिए गंगाजल ख़राब नहीं होता।
  • कुछ भू-रासायनिक क्रियाएं भी गंगाजल में होती रहती हैं, जिससे इसमें कभी कीड़े पैदा नहीं होते।
  • वैज्ञानिक परीक्षणों से पता चला है कि गंगाजल से स्नान करने तथा गंगाजल को पीने से हैजा Plague, Malaria और Decay आदि रोगों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। इस बात की पुष्टि के लिए एक बार डॉ. हैकिन्स, ब्रिटिश सरकार की ओर से गंगाजल से दूर होने वाले रोगों के परीक्षण के लिए आए थे।
  • डॉ. हैकिन्स ने गंगाजल के परिक्षण के लिए गंगाजल में हैजे (कालरा) के कीटाणु डाले,लेकिन हैजे के कीटाणु मात्र 6 घंटें में ही मर गए और जब उन कीटाणुओं को साधारण पानी में रखा गया तो वह जीवित होकर अपने असंख्य में बढ़ गया। इस तरह देखा गया कि गंगाजल विभिन्न रोगों को दूर करने वाला जल है।
  • फ्रांसके सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. हैरेन ने हैजे से मरे अज्ञात लोगों के शवों को गंगाजल में ऐसे स्थान पर डाल दिया, जहाँ कीटाणु तेजी से पनप सकते थे। लेकिन डॉ. हैरेन को आश्चर्य हुआ कि कुछ दिनों के बाद इन शवों से आंत्र शोध व हैजे के ही नहीं बल्कि अन्य कीटाणु भी गायब हो गए।
  • डॉ. हैरेन ने गंगाजल से बैक्टीरियासेपफेज नामक एक घटक निकाला, जिसमें औषधीय गुण हैं।
  • इ्ंगलैंडके चिकित्सक सी. ई. नेल्सन ने गंगाजल पर अनुसंधान करते हुए लिखा है कि गंगाजल में सड़ने वाले जीवाणु ही नहीं होते।
  • 1950 में रूसी वैज्ञानिकों ने हरिद्वार एवं काशी में स्नान के बाद ही कहा था कि उन्हें स्नान के बाद ही ज्ञात हो पाया कि भारतीय गंगा और गंगाजल को इतना पवित्र क्यों मानते हैं।
  • चमत्कृत हैमिल्टन समझ ही नहीं पाए कि गंगाजल की औषधीय गुणवत्ता को किस तरह प्रकट
  • आयुर्वेदाचार्य गणनाथ सेनविदेशी यात्री इब्नबतूता  वरनियरअंग्रेज़ सेना के Captain मूरविज्ञान वेत्ता डॉ. रिचर्डसन आदि सभी ने गंगा पर शोध करके यही निष्कर्ष दिया कि यह नदी अपूर्व है।
  • गंगा नदी में मछलियों और सर्पों की अनेक प्रजातियाँ तो पायी ही जाती हैं, मीठे पानी वाले दुर्लभ डॉलफिन भी पाये जाते हैं।
  • गंगा नदी कृषि, पर्यटन, साहसिक खेलों तथा उद्योगों के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देती है तथा अपने तट पर बसे शहरों की जलापूर्ति भी करती है।
  • गंगा नदी के ऊपर बने पुल, बांध और नदी परियोजनाएँ भारत की बिजली, पानी और कृषि से सम्बन्धित ज़रूरतों को पूरा करती हैं।
  • इलाहाबाद और हल्दिया के बीच 1600 किलोमीटर गंगा नदी जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया है।
  • गंगाजल से हैजाऔर पेचिश जैसी बीमारियाँ होने का खतरा बहुत ही कम हो जाता है, जिससे महामारियाँ होने की सम्भावना बड़े स्तर पर टल जाती है।
  • वैज्ञानिक जाँच के अनुसार गंगा का बायोलॉजिकल ऑक्सीजन स्तर 3 डिग्री से बढ़कर 6 डिग्री हो चुका है।
  • गंगा में 2 करोड़ 90 लाख लीटर प्रदूषित कचरा प्रतिदिन गिरया जा रहा है।
  • विश्व बैंक रिपोर्ट के अनुसार उत्तर-प्रदेश की 12 प्रतिशत बीमारियों की वजह प्रदूषित गंगा जल है।
  • गंगा में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए घड़ियालों की मदद ली जा रही है।
  • 2007 की एक संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के अनुसार हिमालय पर स्थित गंगा की जलापूर्ति करने वाले हिमनद की 2030 तक समाप्त होने की सम्भावना है।

हिन्दू धर्मग्रंथों में देवी गंगा का वाहन मकर यानी मगरमच्छ का उल्लेख मिलता है, जो जलीय प्राणियों में सर्वाधिक शक्तिशाली और परम वेगवान माना गया है। मकर या मगरमच्छ एक प्रतीक है, जो बताता है हमें जल में रहने वाले हर प्राणी की रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि जल में रहने वाला हर प्राणी पारिस्थितिक तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और उसकी अनुपस्थिति में पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ जाएगा।

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