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ऐसा क्या है Breasts में, कि हर बार, हर किसी का ध्यान घूम-फिर कर इन्हीं पर जाता है?

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राह चलते मेरी आदत नज़रें नीचे कर चलने की है. मेरी ये आदत कई सालों में बनी और हज़ारों बार कोशिश करने के बावजूद मैं इसे ठीक नहीं कर पा रही हूं. नज़रें नीची कर चलने की आदत लगी थी, जब मैं बड़ी हो रही थी. स्कूल से घर आते वक़्त कई बार नोटिस करती थी कि लोग मेरे शरीर के एक बढ़ते हुए हिस्से को बड़ी अलग नज़रों से देख रहे हैं. दुकानदार या ऑटो वाले बात करते वक़्त मेरे चेहरे पर देख तो रहे होते थे, पर उनकी आंखें उन्हें धोखा दे कर कहीं और जा रही होती थीं.मुझे एहसास था कि मेरे शरीर में कुछ बदलाव आ रहे हैं, लेकिन ये भी पता था कि बदलाव लड़कों के शरीर में भी आ रहे थे.  फिर उन्हें कोई घूर कर क्यों नहीं देखता था? मेरी बॉडी में ऐसा क्या हो रहा था, जो अचानक से सारे मर्दों की नज़र इस पर पड़ जाती थी?

टाइम के साथ मेरा सवाल और गहरा होता गया और इस सवाल पर और बड़े सवालों की परतें चढ़ती गयीं.

सवाल थे कि ऐसा क्या है औरत के इस अंग में, जो लोग इसे देख कर इतना उत्तेजित हो जाते हैं?

कितनी अजीब बात है, न जब एक औरत एक बच्चे को स्तनपान करवा रही होती है, तो उसके उसी अंग को पूजा जाता है, जीवन के तौर पर देखा जाता है, लेकिन उसके अलावा उन्हें अश्लील समझा जाता है!

तर्क देने वाले ये भी तर्क देंगे कि स्तन उतने ही Sexual Organ हैं, जितना कि Vagina. दोनों का ही इस्तेमाल प्रजनन के लिए होता है, इसलिए स्तनों को देख कर आदमी उत्तेजित हो जाते हैं.

इस तर्क पर मेरे कई सवाल हैं और इसका उत्तर भी.

भारत और अफ्रीका के कई जनजातीय क्षेत्र हैं, जहां स्तन ढकने का रिवाज़ नहीं है. कभी आप वहां जायें और उन जगह से आदमियों से पूछें कि उन्हें महिलाओं के बिन ढके स्तन देख कर उत्तेजना होती है? जवाब आएगा नहीं. वहां ये किसी औरत के साथ ‘ग़लत’ होने की वजह नहीं बनती. लेकिन यही बात अपने यहां उत्तेजना और फिर रेप की वजह बन जाती है. हमारे समाज में तो स्त्री तन ढक कर चलती है, फिर भी आदमी उसे देख कर Excite हो जाता है और फिर ऐसे बेतुके बयान देता है कि रेप की वजह उसके कपड़े थे.

प्रकृति ने महिलाओं के शरीर में स्तन एक ही वजह से दिए, वो वजह थी अपने बच्चे को पोषण देने की. एक ऑर्गन के तौर पर Breasts का एकमात्र यूज़ ये ही है. फिर उन्हें इतना Glamorize क्यों किया जाता है?

क्यों मैगज़ीन Ads या TVC में Breasts Therapy इस्तेमाल कर नए Views या Customer बनाने की कोशिश की जाती है?

मुझे समाज का ये दोगलापन भी समझ नहीं आता, जिसमें एक तरफ़ तो आप Female Body का इस्तेमाल Marketing के लिए करते हो, वहीं अगर एक औरत खुले मेंकरवाती है, तो वो आपके लिए शर्म की बात हो जाती है. क्यों?

यूं तो इंसान ख़ुद को स्तनधारी जीव (Mammal) कहता है, लेकिन उसी स्तनधारी जीव की आधी आबादी को ये कह कर शमिन्दा फ़ील करवाया जाता है कि उसके पास स्तन हैं. स्तन भी शरीर के वैसे ही अंग हैं, जैसे हाथ-पैर, फिर उन्हें लेकर ऐसा व्यवहार सच में समाज का पिछड़ापन दिखाता है.

इंसान जब धीरे-धीरे सामाजिक प्राणी बन रहा था, तब एक औरत के बाल, उसके Hips और उसके स्तन को देख कर ये तय किया जाता था कि वो प्रजनन के लिए फ़िट है या नहीं. इसीलिए पहले के समय में महिलाओं की पेंटिंग्स में उन्हें Fuller Body (भरे हुए शरीर) में दिखाया जाता था. और यही वजह थी कि लड़कियों के लंबे बालों को Ideal माना जाता था.

एक लड़की जब अपने घर में होती है या महिलाओं के बीच होती है, तो आप देखेंगे, कि वो कभी अपने पहनावे या अपनी बॉडी को लेकर Conscious नहीं रहती है. लेकिन घर से एक क़दम बाहर निकालते ही उसे अपने शरीर को एक कवच में डालना पड़ता है. उसके शरीर पर हर तरह के जजमेंट होते हैं. घर वापस आने से अगले दिन निकलने पर वो अपने शरीर को 10 बार देखती है, उसमें कमियां ढूंढती है और अगले दिन और कमज़ोर बन कर बाहर जाती है. उसको बार बार एहसास दिलाया जाता है कि दुनिया उसे देख रही है, उसे अपना शरीर ढक कर रखना चाहिए.

आदमी के शरीर में भी अंग हैं, लेकिन उनको अंग की ही तरह देखा जाता है. Penis दिखा कर आज तक किसी ने कोई प्रोडक्ट या फ़िल्म बेचने की कोशिश नहीं की.

मुझे अभी भी इंतज़ार है उस दिन का, जब स्तन बोलने पर कोई, ‘शशशश, चुप कर’ नहीं कहेगा.

 

 

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