भारत ऐसा देश है जहां हर गली, हर नुक्कड़, हर चौराहे से निकलती हैं अनगिनत कहानियां. लेकिन उन्हें अपनी भाषा, यानि हिंदी में आप तक पहुंचाने के लिए आ गया है गज़ब अड्डा. अनोखी कहानियां, इंडियन और इंटरनेशनल वायरल कंटेंट, ज्ञानवर्धक आर्टिकल्स, न्यूज़, हंसी-मज़ाक, वीडियोस, और बहुत कुछ आपको मिलेगा ग़ज़ब अड्डा में. तो हर दिन जानिए कुछ नया, कुछ अलग, ग़ज़ब अड्डा के ज़रिये. आइये, पढ़िए, शेयर कीजिये और हमारे साथ बनाइये ग़ज़बपोस्ट को इंडिया की सबसे ग़ज़ब हिंदी वेबसाइट.

आखिर क्या वजह थी जो हनुमान ने खुद ही समुद्र में फेंक दी थी रामायण? क्या आप जानना चाहेंगे

0 28

पवन पुत्र हनुमान को श्रीराम का परम भक्त कहा जाता है. उन्होंने श्रीराम की कई मौकों पर मदद की थी. राम भी हनुमान को अपने भाई की तरह ही मानते थे. हनुमान की वीरता के बारे में तो कई किस्से हैं, लेकिन उन किस्सों में एक किस्सा ऐसा है जिसके बारे में शायद ही किसी को पता होगा.

असल में ये किस्सा रामायण से जुड़ा हुआ है. एक बार कुछ ऐसी घटना हुई थी कि हनुमान ने रामायण को उठाकर समुद्र में फेंक दिया. हालांकि ये रामायण महर्षि वाल्मिकि के द्वारा नहीं लिखी गई थी, ये रामायण      खुद हनुमान ने लिखी और इसे हनुमद रामायण के नाम से जाना जाता है.

हनुमान ने लिखी थी हनुमद रामायण

शास्त्रों की माने तो लंका पर विजय पाने के बाद राम-सीता अयोध्या लौट आए. राम के राज्याभिषेक के बाद हनुमान हिमालय पर शिव की आराधना करने के लिए गए. इसी अवधि के दौरान उन्होंने हिमालय की पर्वत शिलाओं पर नाखून से श्रीराम की पूरी जीवनी लिख डाली. इसी को हनुमद रामायण का नाम दिया गया.

बाद में जब महर्षि वाल्मिकि भगवान शंकर को अपनी लिखी रामायण दिखाने पहुंचे, तो उन्होंने पवन पुत्र द्वारा रचित रामायण भी देखी. इस बात से वो निराश हो गए. इस पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कठोर परिश्रम करके ये रामायण लिखी है, लेकिन ये पवन पुत्र द्वारा लिखी गई रामायण के मुकाबले कुछ नहीं है.

उनको ये डर था तो इसकी वजह से उनकी लिखी रचना उपेक्षित हो जाएगी. इस पर हनुमानजी ने अपनी लिखी हुई हनुमद रामायण पर्वत शिला को अपने कंधे पर उठाया और श्रीराम का नाम लेकर समुद्र में फेंक दिया.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like

Leave A Reply

Your email address will not be published.