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क्या आप जानते हैं महाभारत युग में कौन किसका अवतार था?

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1 महाभारत और रामायण

पौराणिक कथाओं के विषय में जब भी जिक्र उठता है, सबसे पहले हमारे जहन में महाभारत और रामायण जैसे महान ग्रंथों का ख्याल आता है। ये दो ऐसे ग्रंथ हैं जिन्हें सदियों से लोग पढ़ते और इनका अध्ययन करते आ रहे हैं। अगर भारत की बात करें तो स्कूल की किताबों के साथ-साथ उच्चतर शिक्षाओं में भी उनका असर मौजूद रहा है।

 

2विस्तृत अध्ययन

लेकिन इतनी बार पढ़ने-सुनने के बाद, विस्तृत अध्ययन के बाद भी कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें अब तक हम जान नहीं पाए हैं। आज हम उन्हीं बिंदुओं पर रोशनी डालने की कोशिश करेंगे।

3अवतार

ये बात तो आप जानते ही हैं कि ईश्वर समय-समय पर अवतार लेते रहे हैं। लेकिन महाभारत की कहानी में कौन किसका अवतार था, इसके विषय में बात करते हैं। हालांकि कुछ के विषय में तो हम जानते ही हैं लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिनके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

4महाभारत

महाभारत की कहानी में लगभग सभी देवता, गंधर्व, यक्ष, रुद्र, वसु अप्सरा और ऋषियों के अंशावतार थे। तो चलिए जानते हैं कि कौन किसके अवतार के रूप में जन्मे थे।

5भगवान कृष्ण

सबसे पहले बात भगवान कृष्ण की, भगवान कृष्ण को 64 कलाओं और अष्ट सिद्धियों से परिपूर्ण माना जाता है। ऐसा माना गया है कि वे स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे।

6बलराम

महाबली बलराम के विषय में माना गया है कि वे विष्णु के आसन बने शेषनाग के अंश के रूप में जन्मे थे। जब कंस ने देवकी के 6 पुत्रों की हत्या की, उसी दौरान देवकी के गर्भ में बलराम पधारे। कृष्ण के बड़े भाई होने की वजह से उन्हें दाउजी के नाम से भी जाना जाता है। महाभारत के युद्ध के दौरान बलराम किसी के पक्ष में नहीं थे और तटस्थ होकर तीर्थयात्रा पर चले गए।

7भीष्म

श्रीकृष्ण के बाद अगर महाभारत का कोई सबसे प्रमुख और चर्चित पात्र रहा तो वो हैं “भीष्म” पितामाह। पांच वसुओं में से एक ‘द्यु’ नामक वसु ने देवव्रत के रूप में जन्म लिया था।

8द्रोणाचार्य

कौरवों और पांडवों के गुरु रहे द्रोणाचार्य अत्यंत शक्तिशाली और पराक्रमी योद्धा थे। माना जाता है देवताओं के गुरु बृहस्पति देव ने ही द्रोणाचार्य के रूप में जन्म लिया था।

9अश्वत्थामा

अश्वत्थामा, गुरु द्रोण के पुत्र थे। जिन्होंने महाकाल, यम, क्रोध, काल के अंशों के रूप में जन्म लिया था। महाभारत के युद्ध में पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने बहुत कोहराम मचाया था।

10कर्ण

कुंती ने विवाह पूर्व कर्ण को जन्म दिया था। उन्हें सूर्यपुत्र कर्ण भी कहा जाता है, क्योंकि कर्ण का जन्म सूर्यदेव के आशीर्वाद से हुआ था। माना जाता है अपने पूर्व जन्म में कर्ण एक असुर थे, जिस कारण एक राजवंशी होने के बाद भी उन्हें सिंहासन का सुख प्राप्त नहीं हुआ।

11दुर्योधन

धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र दुर्योधन का वास्तविक नाम सुयोधन था, लेकिन अपने कृत्य की वजह से उन्हें दुर्योधन नाम से पहचान बनाई। माना जाता है दुर्योधन और उसके भाई पुलस्त्य वंश के राक्षसों के अंश थे।

12अर्जुन

अर्जुन को पांडु पुत्र माना जाता है, लेकिन असल में वे इन्द्र और कुंती के पुत्र थे। दानवीर कर्ण को इन्द्र का अंश ही माना जाता है।

13कृपाचार्य

वेद व्यास के पुत्र और धृतराष्ट्र के सलाहकार रहे विदुर को सूर्य का अंश माना गया है।

14द्रौपदी

महाभारत की सबसे जरूरी और शायद सबसे शक्तिशाली स्त्री पात्र रहीं द्रौपदी का जन्म इन्द्राणी के अवतार के रूप में हुआ था।

15रुक्मिणी

राजा भीषक की पुत्री और भगवान कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी को माता लक्ष्मी का ही अवतार माना जाता है।

 

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