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असफल हों, बार-बार हों, पर एक ही कारण से नहीं ।

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असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो, 

क्या कमी रह गई,  देखो और सुधार करो।

जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,

संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।

कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।”

                                                     -हरिवंशराय बच्चन

फ्रेंड्स हरिवंश राय बच्चन की यह कविता हमें सफल बनने की लिए प्रेरित करती है।

एक सफल व्यक्ति और असफल व्यक्ति के बीच एक छोटा सा फर्क होता है…. सफल व्यक्ति अपनी एक बार की हुई गलती को दोबारा नहीं दोहराता है और असफल व्यक्ति उसी गलती को  बार-बार करता है।

असफलता से यदि आप कुछ सीखते हैं तो यह सफलता के लिए मील का पत्थर है। यदि नहीं  तो असफलता सिर्फ आपके समय की बर्बादी है।

कल्पना कीजिये दो बच्चे रेस की प्रैक्टिस कर रहे हैं ।

पहला बच्चा 100 मीटर की रेस को रिकॉर्ड समय में पूरा करता है, लेकिन 200 मीटर को ऐसा करने में असफल हो जाता है। अगले प्रयास में उसने 200 मीटर को समय पर पूरा कर लिया ,लेकिन 300 मीटर को पूरा नही कर सका। उसका हर प्रयास उसे हर अगली बार सफल होने में मददगार सबित हो रहा है। वह कई  बार फेल हो रहा है,लेकिन हर प्रयास के बाद ज्यादा बेहतर कर रहा है।

इससे उलट दूसरा बच्चा पिछली 200 मीटर की रेस को रिकॉर्ड समय में पूरा नही कर पा रहा ,या तो वह रेस की शुरुआत ठीक से नही करता या  रेस पूरी नही करता या बीच मे छोड़ देता है।

दूसरे बच्चे में कोई प्रगति नही हो रही है। इस स्थिति में ,वह हताश हो सकता है।

या वह दौड़ना पसंद नही करता है …

या वह दौड़ता है, भले ही उसमे दौड़ने की योग्यता नही है।

या ऐसा इसलिए हो सकता क्योंकि उस बच्चे ने रेस शुरू होने के पहले ठीक से रेस की starting और ending techniques की प्रैक्टिस नहीं की है।

इसका मतलब है कि उसने जितने प्रयास किये वो सारे प्रयास व्यर्थ गए।

इस प्रकार दोनों बच्चों में अंतर साफ़ है।

असफल होना तब तक सही है जब तक यह आपको आगे बढ़ने में मदद करे।

यदि बहुत सी असफलताओं के बाद भी आप में कोई सुधार नही हो रहा है, तो यह इस बात का  इशारा  है कि यह कार्य आपके अनुकूल नही है, आप अपने पसंद का कोई अन्य काम करें या इस काम को थोड़े समय के लिए टाल दें।

अब सवाल यह है कि, ये कैसे पता करें कि ये असफलताएँ आपके सफलता में मददगार हैं कि नही?..

क्या आपको लगता है कि आपने इन असफलताओं से कुछ सीखा है, या सीखने में कोई सुधार नहीं हुआ है।

आपके मन में जो हताशा उपजी है उसके कई कारण हो सकते हैं ।

पहला या तो कार्य कठिन है ।

दूसरा या तो आप इसे सिर्फ समय की बर्बादी समझतें हैं।

आपने जबसे शुरुआत की है तबसे अब तक आप में कितना सुधार हुआ है?

इसके पता करने के लिए आप किसी अन्य व्यक्ति या दोस्त जो ईमानदारी से अपनी राय दे सकते हैं उनकी मदद लें।

क्या आपने कभी अवकाश लेने की सोचा? कभी-कभी इन असफलताओं से भी ऐसी सीख  मिलती है जो तब सामने आती है जब आप इस कार्य से अलग कोई दूसरा काम करते हैं।

इसलिए थोड़ा अवकाश लेकर देखें, ये असफलताएँ भी आपकी सफलता में सहायक हो सकती हैं ।

असफलता से सीखने योग्य कुछ बातें :

1.असफलता आपको फीड बैक देती है, जिससे आप अगली बार अपने काम में और सुधार करते हैं ।
2.ध्यान रखिये कि… “हार के बाद ही जीत है, रात के बाद ही सुबह होती है”।
3.आपके प्रयास व्यर्थ नहीं जायेंगे परन्तु गलतियों को  एक ही कारण से दोहराना नहीं चाहिए।

 

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